यह तो बड़ा खेल ही लग रहा था कि असदुद्दीन ओवैसी का पश्चिम बंगाल में पैर जमाना आसान नहीं होगा, लेकिन रविवार, 22 मार्च 2026 को सब कुछ एक बार फिर बदल गया। Asaduddin Owaisi, प्रमुख of All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) ने खुलासे के साथ इसकी पुष्टि की थी। उनका दावा है कि अब पश्चिम बंगाल के मुस्लिम वोटरों के पास तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अलावा एक वैकल्पिक विकल्प उपलब्ध होगा। यह साझेदारी हमारे सामने एक नया सवाल खड़ी करती है: क्या 2026 के चुनावों में बिहार का मॉडल पश्चिम बंगाल पर लागू होगा?
गठबंधन का पीछे का कारण क्या है?
यहाँ बात यह है कि ओवैसी लंबे समय से तृणमूल सरकार पर शिकायत कर रहे थे। वे कहते हैं कि मुस्लिम वोट बैंक को सुरक्षित करने के नाम पर उनकी धार्मिकता को दबाया जा रहा है। जब उन्होंने कहा, "इकरारनामिया नहीं, बराबरी," तो इसका तात्पर्य सीधा ममता बanerji के खिलाफ होता है। Mamata Banerjee, Chief Minister of West Bengal के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति हो सकती है।
हुमायूं कबीर, जो स्वयं तृणमूल के पूर्व विधायक थे, ने अपनी नई पार्टी बनाई थी। Humayun Kabir, Founder of Aam Janata Unnayan Party (AJUP) ने अपने 182 सीटों पर प्रतिद्वंदी होने का फैसला किया। इसे देखते हुए ऐसा लगता है कि कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए कोई प्रत्यक्ष लड़ाई शुरू हो रही है।
चुनाव की तिथि और योजनाएं
आगामी चुनाव दो फेज में होंगे—23 अप्रैल और 29 अप्रैल को। मतगणना 4 मई को होगी। यह जानकारी Election Commission of India द्वारा दी गई है। कोलकाता में 25 मार्च को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि यह गठबंधन वोट बांटने के लिए नहीं, बल्कि सशक्त बनाने के लिए है।
लेकिन वास्तविकता थोड़ी अलग है। बर्बरपुर सीट पर पुनम बेगम का नाम तृणमूल की महत्वपूर्ण उम्मीदवार के रूप में उभरा है। Bhabanipur एक हाई-प्रोफाइल सीट है जहां बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद हैं। अगर वहां से तृणमूल हारता है, तो राजनीतिक कंपन पूरे राज्य में महसूस होगा।
- AIMIM: लगभग 8 सीटें
- AJUP: 182 सीटें
- कुल सीटें: 294
विरोधी पार्टियों की प्रतिक्रिया
विरोध पक्ष का तर्क यह है कि यह गठबंधन बीजेपी के पक्ष में काम कर सकता है। कई नेताओं ने कहा कि यदि मुस्लिम वोट टूट जाए, तो भाजपा फायदा उठाएगी। ओवैसी की प्रतिक्रिया बहुत स्पष्ट थी: "लोकतंत्र में लोगों को किसी भी पार्टी के लिए वोट देने का अधिकार है।" यह बयान उनके समर्थकों के बीच काफी प्रभाव डालने वाला रहा।
अगर परिणाम में कोई अधिकांश पार्टी नहीं मिल पाती है, तो यह गठबंधन सरकार बनाने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। ओवैसी का मानना है कि 2026 का परिणाम बंगाल के राजनीतिक स्थायी ढांचे को बदल सकता है।
अगले कदम क्या हैं?
आगे चलकर दोनों पार्टियों की धड़कन एक होगी। 154 उम्मीदवारों की सूची पहले ही जारी कर दी गई है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह गुट आम जनता की समस्याओं को लेकर कार्य करता है या सिर्फ राजनीतिक हिसाब-किताब पर आधारित है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर तृणमूल अपना पुराना प्रभाव खो देता है, तो बंगाल का इक्वलिनियम पूरी तरह बदल जाएगा।
Frequently Asked Questions
क्या यह गठबंधन बीजेपी के लिए फायदेमंद होगा?
विरोधी दलों का मानना है कि मुस्लिम वोट में टूट बीजेपी के लिए अवसर बन सकता है। हालांकि, AIMIM का दावा है कि यह कमजोर वर्गों के अधिकारों के लिए है, इसलिए इसका प्रभाव अभी अनिश्चित है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीख कब है?
चुनाव दो चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पहला फेज 23 अप्रैल 2026 को और दूसरा 29 अप्रैल 2026 को है। मतगणना की तिथि 4 मई, 2026 निर्धारित है।
AIMIM कितनी सीटों पर उम्मीदवार देगा?
AIMIM लगभग 8 सीटों पर अपना उम्मीदवार प्रस्तुत करेगा, जबकि इसके सहयोगी AJP 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। कुल सीटों की संख्या 294 है।
हुमायूं कबीर किस पार्टी के अध्यक्ष हैं?
वे Aam Janata Unnayan Party (AJUP) के संस्थापक हैं। वे तृणमूल कांग्रेस के पूर्व विधायक थे जिन्हें निलंबित कर दिया गया था और अब उन्होंने अपनी नई पार्टी बनाई है।